उत्तराखंड में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं. इस लिहाज से BJP ने क्षेत्रीय, जातिगत और अलग-अलग गुटों से जुड़े समीकरण सुलझाने के लिए इस कैबिनेट विस्तार का उपयोग किया है
लंबे इंतजार के बाद उत्तराखंड सरकार ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार कर दिया है. पांच नए मंत्रियों को शामिल किए जाने के साथ ही कैबिनेट की संख्या 12 मंत्रियों तक पहुंच गई है. नियमानुसार उत्तराखंड में इतने ही मंत्री हो सकते हैं.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कैबिनेट लंबे समय से कम मंत्रियों के साथ काम कर रही थी. ऐसे में खाली पदों को भरना राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि विधानसभा चुनाव में अब एक साल से भी कम का समय बचा है.

कैबिनेट में शामिल होने वाले नए चेहरे खजान दास, मदन कौशिक, प्रदीप बत्रा, भरत चौधरी और राम सिंह कैड़ा हैं. साल 2022 में जब BJP दोबारा सत्ता में आई थी, तब धामी ने केवल आठ मंत्रियों के साथ शपथ ली थी. बाद में 2023 में मंत्री चंदन रामदास के निधन और प्रेम चंद अग्रवाल के इस्तीफे के बाद यह संख्या और कम हो गई थी. हालांकि केंद्रीय नेतृत्व के साथ विचार-विमर्श के संकेत मिलते रहे थे, लेकिन कैबिनेट अब तक अधूरी ही थी.
विस्तार के समय से संकेत मिलता है कि यह कदम न केवल प्रशासनिक मजबूती, बल्कि राजनीतिक सुधार के उद्देश्य से भी उठाया गया है. अगले साल होने वाले चुनावों के मद्देनजर, BJP ने राज्य के भीतर क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन बनाने का प्रयास किया है.
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक को मंत्रिमंडल में शामिल करना इस मायने में काफी अहम माना जा रहा है. पिछले विधानसभा चुनाव में हरिद्वार क्षेत्र में BJP का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा था, जहां पार्टी 11 में से केवल तीन सीटें ही जीत पाई थी. उनकी वापसी को उस क्षेत्र में पार्टी की स्थिति मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है. साथ ही, यह संगठन के भीतर उन वरिष्ठ नेताओं को भी एक सकारात्मक संदेश है जो खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे थे.
टिहरी गढ़वाल क्षेत्र से तीन बार के विधायक खजान दास का दलित मतदाताओं के बीच अच्छा प्रभाव माना जाता है. उन्हें मंत्री बनाकर पार्टी ने सामाजिक पहुंच बढ़ाने की कोशिश की है. इसी तरह, कुमाऊं से राम सिंह कैड़ा और रुद्रप्रयाग से भरत चौधरी को शामिल करना राज्य के दो प्रमुख क्षेत्रों- कुमाऊं और गढ़वाल के बीच प्रतिनिधित्व को संतुलित करने की कोशिश दिखाता है.
नए मंत्रियों की राजनीतिक पृष्ठभूमि भी ध्यान खींचने वाली है. प्रदीप बत्रा, राम सिंह कैड़ा और भरत चौधरी, ये सभी BJP में शामिल होने से पहले कांग्रेस या अन्य दलों से जुड़े रहे हैं. उन्हें पद दिया जाना यह संकेत देता है कि ऐसे फैसलों में चुनावी जीत की क्षमता और स्थानीय प्रभाव अभी भी बड़ी भूमिका निभाते हैं.
कुल मिलाकर, इस कैबिनेट विस्तार की संरचना बताती है कि BJP संगठनात्मक हितों और चुनावी रणनीति के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है. क्षेत्रीय और सामाजिक प्रभाव वाले नेताओं को जगह देकर पार्टी चुनावों से पहले अपना कोर वोट बैंक मजबूत करने के साथ-साथ आंतरिक गुटबाजी को भी मैनेज कर रही है.
दूसरी ओर, विपक्षी कांग्रेस ने इस विस्तार की आलोचना की है और मंत्रियों के चयन व समय पर सवाल उठाए हैं. पार्टी प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने कहा कि पांच नए मंत्रियों में से तीन का ‘कांग्रेस डीएनए’ है. उन्होंने तर्क दिया कि BJP अपने मूल कैडर के बजाय बाहर से आए नेताओं पर निर्भर है. उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा कैबिनेट में बहुमत उन मंत्रियों का है जिनका बैकग्राउंड कांग्रेस रहा है.
वरिष्ठ कांग्रेस नेता करण माहरा ने कहा कि इन नियुक्तियों ने BJP के उस दावे की पोल खोल दी है जिसमें वह खुद को कैडर आधारित पार्टी बताती है. उन्होंने तर्क दिया कि सालों से काम कर रहे समर्पित कार्यकर्ताओं को किनारे कर दूसरे दलों से आए नेताओं को मंत्री पद दिए जाने से संगठन के भीतर असंतोष पैदा हो सकता है.
हालांकि, BJP ने इस विस्तार का बचाव करते हुए इसे एक आवश्यक कदम बताया है. प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि इस कदम से शासन मजबूत होगा और विकास कार्यों में तेजी आएगी. उन्होंने नए मंत्रिमंडल को क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन का प्रतिबिंब बताया. पार्टी नेताओं का यह भी कहना है कि यह निर्णय उचित विचार-विमर्श के बाद प्रशासनिक दक्षता में सुधार के उद्देश्य से लिया गया है.
इस विस्तार के साथ धामी कैबिनेट अपनी पूर्ण क्षमता के करीब पहुंच गई है और कैबिनेट की एक पुरानी कमी दूर हो गई है. साथ ही, यह उन राजनीतिक हिसाब-किताब को भी दिखाता है जो आमतौर पर चुनाव से ठीक पहले ऐसे बड़े फैसलों को आकार देते हैं.


